शनिवार, 12 सितंबर 2020

                                                        ॐ श्री गणेशाय नमः                            

                                             तस्वीर से वास्तु दोष दूर करे 

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में श्रृंगार, हास्य व शांत रस उत्पन्न करने वाली तस्वीरें ही लगाई जानी चाहिए।घर के अन्दर और बाहर सुन्दर चित्र , पेंटिंग , बेल- बूटे , नक्काशी लगाने से ना सिर्फ सुन्दरता बढती है , वास्तु दोष भी दूर होते है।  

 
  • फल-फूल व हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें जीवन शक्ति का प्रतीक है। उन्हें पूर्वी व उत्तरी दीवारों पर लगाना शुभ होता है। इनसे जीवन में खुशहाली आती है।
  • लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें भी उत्तर दिशा में लगानी चाहिए। ऐसा करने से धन लाभ होने की संभावना अधिक होती है।
  • यदि आप पर्वत आदि प्राकृतिक दृश्यों की तस्वीरें लगाना चाहते हैं तो दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाएं।
  • नदियों-झरनों आदि की तस्वीरें उत्तरी व पूर्वी दिशा में लगाना शुभ होता है।
  • वसुदेव द्वारा बाढग़्रस्त यमुना से श्रीकृष्ण को टोकरी में ले जाने वाली तस्वीर समस्याओं से उबरने की प्रेरणा देती है। इसे हॉल में लगाना चाहिए।
  • युद्ध प्रसंग, रामायण या महाभारत के युद्ध के चित्र, क्रोध, वैराग्य, डरावना, वीभत्स, दुख की भावना वाला, करुण रस से ओतप्रोत स्त्री, रोता बच्चा, अकाल, सूखे पेड़ कोई भी चित्र घर में न लगायें।
  • घर में दक्षिण दीवार पर हनुमान जी का लाल रंग का चित्र लगाएं। ऐसा करने से अगर मंगल आपका अशुभ है तो वो शुभ परिणाम देने लगेगा। हनुमान जी का आशीर्वाद आपको मिलने लगेगा। साथ ही पूरे परिवार का स्वास्थय अच्छा रहेगा।
  • घर का उत्तर पूर्व कोना (इशान कोण) स्वच्छ रखें व वंहा बहते पानी का चित्र लगायें | (ध्यान रहे इस चित्र में पहाड़/पर्वत न हो )
अपनी तस्वीर उत्तर या पूर्व दिशा मैं लगायें
  • उत्तर क्षेत्र की दीवार पर हरियाली या हरे चहकते हुए पक्षियों (तोते की तस्वीर) का शुभ चित्र लगाएं। ऐसा करने से परिवार के लोगों की एकाग्रता बनेगी साथ ही बुध ग्रह के शुभ परिणाम मिलेंगे। उत्तर दिशा बुध की होती है।
  • लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें भी उत्तर दिशा में लगानी चाहिए। ऐसा करने से धन लाभ होने की संभावना है।
  • घर में जुडवां बत्तख व हंस के चित्र लगाना लगाना श्रेष्ठ रहता है। ऐसा करने से समृद्धि आती है।
  • घर की तिजोरी के पल्ले पर बैठी हुई लक्ष्मीजी की तस्वीर जिसमें दो हाथी सूंड उठाए नजर आते हैं, लगाना बड़ा शुभ होता है। तिजोरी वाले कमरे का रंग क्रीम या ऑफ व्हाइट रखना चाहिए।
  • घर में नाचते हुए गणेश की तस्वीर लगाना अति शुभ होता है।
  • बच्चा जिस तरफ मुंह करके पढता हो, उस दीवार पर मां सरस्वती का चित्र लगाएं। पढाई में रूचि जागृत होगी।
  • बच्चों के उत्तर-पूर्व दीवार में लाल पट्टी के चायनीज बच्चों की युगल फोटों लगाएं। ऎसा करने से घर में खुशियां आएंगी और आपके बच्चो का करियर अच्छा बनेगा। इन उपायों को अपनाकर आप अपने बच्चे को एक अच्छा करियर दे सकते हैं और जीवन में सफल बना सकते हैं।
  • अध्ययन कक्ष में मोर, वीणा, पुस्तक, कलम, हंस, मछली आदि के चित्र लगाने चाहिए।
  • बच्चों के शयन कक्ष में हरे फलदार वृक्षों के चित्र, आकाश, बादल, चंद्रमा अदि तथा समुद्र तल की शुभ आकृति वाले चित्र लगाने चाहिए।
  • फल-फूल व हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें जीवन शक्ति का प्रतीक है। उन्हें पूर्वी व उत्तरी दीवारों पर लगाएं।
  • ऐसे नवदम्पत्ति जो संतान सुख पाना चाहते हैं वे श्रीकृष्ण का बाल रूप दर्शाने वाली तस्वीर अपने बेडरूम में लगाएं।
  • यदि आप अपने वैवाहिक रिश्ते को अधिक मजबुत और प्रसन्नता से भरपूर बनाना चाहते हैं तो अपने बेडरुम में नाचते हुए मोर का चित्र लगाएं।
  • यूं तो पति-पत्नी के कमरे में पूजा स्थल बनवाना या देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तुशास्त्र में निषिद्ध है फिर भी राधा-कृष्ण अथवा रासलीला की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं। इसके साथ ही बांसुरी, शंख, हिमालय आदि के चित्र दाम्पत्य सुख में वृद्धि के कारक होते हैं।
  • कैरियर में सफलता प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा में जंपिंग फिश, डॉल्फिन या मछालियों के जोड़े का प्रतीक चिन्ह लगाए जाने चाहिए। इससे न केवल बेहतर कैरियर की ही प्राप्ति होती है बल्कि व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है।
  • अपने शयन कक्ष की पूर्वी दीवार पर उदय होते हुए सूर्य की ओर पंक्तिबद्ध उड़ते हुए शुभ उर्जा वाले पक्षियों के चित्र लगाएं। निराश, आलस से परिपूर्ण, अकर्मण्य, आत्मविश्वास में कमी अनुभव करने वाले व्यक्तियों के लिए यह विशेष प्रभावशाली है।
  • अगर किसी का मन बहुत ज्यादा अशांत रहता है तो अपने घर के उत्तर-पूर्व में ऐसे बगुले का चित्र लगाना चाहिए जो ध्यान मुद्रा मैं हो।
  • स्वर्गीय परिजनों के चित्र दक्षिण की दीवार पर लगाने से सुख समृधि बढेगी
  • यदि ईशान कोण में शौचालय हो, तो उसके बाहर शिकार करते हुए शेर का चित्र लगाएं।
  • अग्नि कोण में रसोई घर नहीं हो, तो उस कोण में यज्ञ करते हुए ऋषि-विप्रजन की चित्राकृति लगानी चाहिए।
  • रसोई घर में माँ अन्नपूर्णा का चित्र शुभ माना जाता है।
  • रसोई घर आग्नेय कोण में नहीं है तो ऋषि मुनियों की तस्वीर लगाए।
  • मुख्य द्वार यदि वास्तु अनुरूप ना हो तो उस पर नक्काशी , बेल बूटे बनवाएं।
  • दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए घर में राधा कृष्ण की तस्वीर लगाए 
  • पढने के कमरे में माँ सरस्वती , हंस , वीणा या महापुरुषों की तस्वीर लगाएं।
  • व्यापर में सफलता पाने के लिए कारोबार स्थल पर सफल और नामी व्यापारियों के चित्र लगाएं।
  • ईशान कोण में शौचालय होने पर उसके बाहर शेर का चित्र लगाएं।
  • पूर्वजों की तस्वीर देवी देवताओं के साथ ना लगाएं।उनकी तस्वीर का मुंह दक्षिण की ओर होना चाहिए।
  • दक्षिण मुखी भवन के द्वार पर नौ सोने या पीतल के नवग्रह यंत्र लगाए और हल्दी से स्वस्तिक बनाए।
  • सोने का कमरा आग्नेय कोण में हो तो पूर्वी दीवार के मध्य में समुद्र का चित्र लगाए।

                                                 ॐ श्री गणेशाय नमः 

पूजा साधन में आपकी सकारत्मक ऊर्जा  को कैसे सुरछित करे 

1 -साधना में आपका आसान कुश या कंबल का रखे 
2 -जो आप जप या पूजा कर रहे उसकी संख्सा भूलकर किसी को मत बोले 
3 -दाहिने जल लेकर 3 बार गायत्री मन्त्र बोलकर अपने चारो ओर सुरछित कर लेवे 
4 -कपूर और सेंधा नमक जल में डालकर स्नान करे 
5 -किसी दूसरे का कुर्सी , सायन आसान प्रयोग मत करे 
6 - अपने वस्त्र स्वंय साफ करे 
7 - साबुन तेल ,सरसो तेल का परित्यग करे 
8 -भोजन स्वंय  बनाया करे 
9 -अपन माला  किसी को मत देवे 
10 -जप के मंत्र किसी को मत बोले 
11 -मानसिक और शारीरिक स्वछता पर ध्यांन देवे 


 

 

रविवार, 26 जनवरी 2020

                                                          ॐ श्री गणेशाय नम
सूर्य ग्रह : यदि आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह बुरे प्रभाव दे रहा है तो आप केसर या का उपयोग करें। घर के लिए
रूम फ्रेशनर लाएं और शरीर के लिए इस सुगंध का कोई इत्र उपयोग करें।

चंद्र ग्रह : चंद्रमा मन का कारण है अत: इसके लिए चमेली और रातरानी के इत्र का उपयोग कर सकते हैं।
मंगल ग्रह : मंगल ग्रह की परेशान से मुक्त होने के लिए लाल चंदन का इत्र, तेल अथवा सुगंध का उपयोग कर सकते हैं।

बुध ग्रह : बुध ग्रह की शांति के लिए चंपा का इत्र तथा तेल का प्रयोग बुध की दृष्टि से उत्तम है।
गुरु ग्रह : केसर और केवड़े का इत्र के उपयोग के अलावा पीले फूलों की सुगंध से गुरु की कृपा पाई जा सकती है।

शुक्र ग्रह : शुक्र को सुधारने के लिए सफेद फूल, चंदन और कपूर की सुगंध लाभकारी होती है। चंपा, चमेली और गुलाब की तीक्ष्ण खुशबू से खराब हो जाता है।
शनि ग्रह : शनि के खराब प्रभाव को अच्छे प्रभाव में बदलने के लिए कस्तुरी, लोबान तथा सौंफ की सुगंध का उपयोग कर सकते हैं।

राहु और केतु छाया ग्रह : काली गाय का घी व कस्तुरी के इत्र का उपयोग कर राहु ग्रह के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। यही यह कहीं से उपलब्ध न हो तो घर के शौचालय को साफ सुधरा रख कर घर में प्रतिदिन कर्पूर जलाएं। गुड़ और घी को मिलाकर उसे कंडे पर जलाएं।


पहला टोटका
मनोकामना पूर्ति हेतु : किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को ताजे गुलाब के फूल बजरंगबली पर 11 की संख्या में चढ़ायें। ऐसा लगातार 11 मंगलवार तक करने पर बजरंगबली प्रसन्न होकर साधक की मनोकामना पूर्ण करते हैं।
दूसरा टोटका
अचानक धन प्राप्ति हेतु : किसी भी शाम को गुलाब के फूल में कपूर का टुकड़ा रखकर उसे जला दें। कपूर के जल जाने के बाद उस फूल को देवी को चढ़ा दें।













































































































































































































































































































































                                               

बुधवार, 17 अगस्त 2016

मित्रो आइये जानते है मंगल का कर्क राशि में प्रभाव󾮞󾮞󾮞
कर्क राशि में स्थित होने पर मंगल बलहीन हो जाते हैं तथा इसके अतिरिक्त मंगल कुंडली में अपनी स्थिति विशेष के कारण अथवा किसी बुरे ग्रह के प्रभाव के कारण भी कमजोर हो सकते हैं। कुंडली में मंगल की बलहीनता कुंडली धारक की शारीरिक तथा मानसिक उर्जा पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है तथा इसके अतिरिक्त जातक रक्त-विकार संबधित बिमारियों, तव्चा के रोगों, चोटों तथा अन्य ऐसे बिमारीयों से पीडित हो सकता है जिसके कारण जातक के शरीर की चीर-फाड़ हो सकती है तथा अत्याधिक मात्रा में रक्त भी बह सकता है। मंगल पर किन्हीं विशेष ग्रहों के बुरे प्रभाव के कारण जातक किसी दुर्घटना अथवा लड़ाई में अपने शरीर का कोई अंग भी गंवा सकता है। इसके अतिरिक्त कुंडली में मंगल की बलहीनता जातक को सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन, तथा निर्णय लेने में अक्षमता जैसी समस्याओं से भी पीडि़त कर सके
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बुधवार, 2 मार्च 2016

  काल के टिप्स
गुरु ग्रह की शान्ति हेतु उपाय
गुरु ग्रह की शान्ति हेतु उपाय- यदि जन्म कुण्डली में गुरु ग्रह अशुभ फल दे रहा हो तो निम्नांकित मंत्रों के जप करने से इसकी अशुभता में कमी आ जाती है।
वैदिक मंत्र- ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।
पुराणोक्त मंत्र- ॐ देवानां च ऋषीणां च गुरु कांचन संन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्।।
तंत्रोक्त मंत्र- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः ।
जप संख्या- 19000। वर्तमान कलयुग में चार गुना (19000 *4 = )76000 
गुरु गायत्री मंत्र- ॐ अंगिरो जाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि तन्नो गुरु प्रचोदयात्।।
रत्न- गुरु के शुभत्व में वृद्धि हेतु सोने या चांदी में सवा पांच रत्ती का पुखराज शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए।
यंत्र- गुरु यंत्र को सोने या चांदी के पत्र पर लिखवाकर या भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर पूजा प्रतिष्ठा करवाकर गले या दाहिनी भुजा में धारण करना चाहिए।
दान सामग्री- पीले वस्त्र, पुखराज, पीले चावल, चने की दाल, हल्दी, शहद,पीले फल, घी धर्म ग्रन्थ, सुवर्ण पीली मिठाई दक्षिणा आदि।
अन्य उपाय- गुरु की प्रसन्नता हेतु बृहस्पति वार का व्रत धारण करना चाहिए। पीले पुष्पों से पूजन करना चाहिए, केशर का तिलक लगाना चाहिए, श्री विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करना, गौ सेवा करना, पीले वस्त्रों का प्रयोग करना, व दानादि से इनकी अशुभता को कम किया जा सकता है।

शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

                                                          समय
प्रतिछा है समय की
जो कुनकुने पानी की तरह
सहला देगा खुरदुरी हथेलिया
बेमोल बांट देगा
अनमोल मुस्कुराहटें
माथे पर जमी हुईं
विवस्तओ की सिलवटे
उतर आएंगी पलकों तक
नई दृस्टि का नव लोक तकने तक
प्रतिछा है बस समय की
जब घुटनो के बल
रेंगता हुआ आदमी
आसमानी सितारे कांख  दबोचे
      चल पड़ेगा
रौशनी के अंतहीन सफर पर
सड़को पर ऊंघती नाघ की धुप
चैत की प्यास की तरह लगेगी हुलसने
               "मधु राज "उर्फ़ राजा पंडित 

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016


           अदभुत फल  देती है   मंगल और शनि की युति 
                                                          कर्मो के आधार पर देते है जातक को दण्ड
 शनि और मंगल दोनों की गिनती पाप ग्रहों में होती है। कुंडली में इनकी अशुभ स्थिति भाव फल का नाश कर व्यक्ति को परेशानियों में डाल सकती है, लेकिन कभी कभी ये योग जातक को बुलंदी पर ले जाती है 
शनि-मंगल युति-प्रतियुति जीवन में आकस्मिकता का समावेश कर देती है। वैवाहिक जीवन, नौकरी, व्यवसाय, संतान, गृह सौख्य इनसे संबंधित शुभ-अशुभ घटनाएँ जीवन में अचानक घटती हैं। अचानक विवाह जुड़ना, अचानक प्रमोशन, बिना कारण घर बदलना, नौकरी छूटना, कार्यस्थल या शहर-देश से पलायन आदि शनि-मंगल युति के आकस्मिक परिणाम होते हैं।यहाँ  तक की राज नीति अस्थिरता भी ये ग्रह ही देते है 
                    प्रस्तुति ज्योतिष भुसन राजा पण्डित
                                       3G ASTRO SOCIAL SERVICE DIGITAL INDIA FOUNDATION
                                                                        07033034433
आप जाने अपने संवत के बारे में 

नये संवत की शुरुआत

प्राचीन काल में नया संवत चलाने से पहले विजयी राजा को अपने राज्य में रहने वाले सभी लोगों को ऋण-मुक्त करना आवश्यक होता था। राजा विक्रमादित्य ने भी इसी परम्परा का पालन करते हुए अपने राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों का राज्यकोष से कर्ज़ चुकाया और उसके बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मालवगण के नाम से नया संवत चलाया। भारतीय कालगणना के अनुसार वसंत ऋतु और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की तिथि अति प्राचीन काल से सृष्टि प्रक्रिया की भी पुण्य तिथि रही है। वसंत ऋतु में आने वाले वासंतिक 'नवरात्र' का प्रारम्भ भी सदा इसी पुण्य तिथि से होता है। विक्रमादित्य ने भारत की इन तमाम कालगणनापरक सांस्कृतिक परम्पराओं को ध्यान में रखते हुए ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की तिथि से ही अपने नवसंवत्सर संवत को चलाने की परम्परा शुरू की थी और तभी से समूचा भारतइस पुण्य तिथि का प्रतिवर्ष अभिवंदन करता है।दरअसल, भारतीय परम्परा में चक्रवर्ती राजा विक्रमादित्य शौर्य, पराक्रम तथा प्रजाहितैषी कार्यों के लिए प्रसिद्ध माने जाते हैं। उन्होंने 95 शक राजाओं को पराजित करके भारत को विदेशी राजाओं की दासता से मुक्त किया था। राजा विक्रमादित्य के पास एक ऐसी शक्तिशाली विशाल सेना थी, जिससे विदेशी आक्रमणकारी सदा भयभीत रहते थे। ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, कला संस्कृति को विक्रमादित्य ने विशेष प्रोत्साहन दिया था। धंवंतरि जैसे महान वैद्य, वराहमिहिर जैसे महान ज्योतिषी और कालिदास जैसे महान साहित्यकार विक्रमादित्य की राज्यसभा के नवरत्नों में शोभा पाते थे। प्रजावत्सल नीतियों के फलस्वरूप ही विक्रमादित्य ने अपने राज्यकोष से धन देकर दीन दु:खियों को साहूकारों के कर्ज़ से मुक्त किया था। एक चक्रवर्ती सम्राट होने के बाद भी विक्रमादित्य राजसी ऐश्वर्य भोग को त्यागकर भूमि पर शयन करते थे। वे अपने सुख के लिए राज्यकोष से धन नहीं लेते थे।
                                   प्रस्तुति ज्योतिष भुसन राजा पण्डित
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शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

                                                      बालकोनी का वास्तु
                                                                      ज्योतिष भुसण  राजा पण्डित (A .I .F . S NEW  DEL H I )
 आपको  प्रणाम मित्रो 
आज आपको बता रहा हु बालकोनी  का वास्तु के बारे में जैसा आप जानते है की हर जीव को साँस की जरूरत होती और ठीक उसी  प्रकार  आपके घर को भी साँस की जरुरत होती है जो  नामक साँस नाली  क्युकी  ये  जरुरी है यदि आपका भवन पूर्वमुखी है, तो बालकनी पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। ऐसे भवन में बालकनी पश्चिम या दक्षिण दिशा में कदापि न बनायें।पश्चिममुखी भवन में बालकनी को उत्तर या पश्चिम की दिशा में बनाना शुभ माना जाता है।जिन लोगों का मकान उत्तरमुखी है, उसमें बालकनी को पूर्व या उत्तर दिशा में बनाना हितकर रहता है। यदि आपका भूखण्ड दक्षिणमुखी है तो, बालकनी को पूर्व या दक्षिण दिशा में बनाना लाभप्रद साबित होता है। बालकनी का चयन हमेशा भवन के मुख के आधार पर ही करना उचित रहता है। परन्तु या ध्यान रखना चाहिए कि प्रातःकालीन की सकारात्मक उर्जा एंव प्रकाश का प्रवेश घर में निर्बाध रूप से होता रहें। वास्‍तु की इन टिप्‍स का पालन कर आप अपने घर में खुशियां ही खुशियां ला सकते हैं। इससे न केवल आपके घर में शांति बनी रहेगी बल्कि धनलक्ष्‍मी का भी वास होगा। ये टिप्‍स सिर्फ मकान ही नहीं बकि फ्लैट पर भी लागू होती हैं।​  जो की बहुत जरुरी है 

सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

                                            धर्म बना   आज की  राजनीति का पखवाड़ा 
धर्म और राजनीति का समन्वय आज से ही नहीं पुरातन काल से सकारात्मक  रहा है कोई भी कैसा अगर राजा को निर्णय लेना होता था तो वो कुलगुरु से सलाह मांगते थे और आचर्य चाणक्य या गुरुद्रोण  इसके स्पस्ट उदाहरण है जो भी जैसा भी मेरा एक ही कथन है सकारत्मक राजनीती बिना धर्म के सम्भव नहीं है क्यों की धर्म के जो गुण है वो स्पस्ट तरीके से एक  राजीनीति रूपी सीसे में झलकता है खुद आप देख लेवे की  धर्म के मुख्य आधारभूत सिद्धान्त सत्य, सेवा, सहयोग, सुमिरन, समर्पण है ये और एक  राष्ट्र  के जो नियम है वो भी लगभग ऐसा है है राजनीती सिद्धांन्त भी   कुछ ऐसा ही है चाहे वो समानता का या सहयोग की भवना का हो दूसरे सब्दो में राजनीती का मुख्य उद्देश है की किसी भी देश के कन्नून विधि के अनुरूप ही कोई कार्य हो और कार्य भी देश हीत और नागरिक हित को देखकर इसलिए राष्ट्र सभी धर्मो से उच्च राष्ट्र धर्म माना  गया है  और किसी भी धर्म को संचालित करने की विधि एक  सकारत्मक जीव के अंदर होना चाहिए और वो राजनीती नामक विधि से ही सम्भव है राष्ट्र धर्म की रच्छा कर सकती ही भगवान ने   गीता में खुद कहा है  ऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वित:। सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकर:कर्ता सात्विक उच्यते।। (गीता 18/26)- लालच व अंहकार से मुक्त, धैर्य व उत्साह से युक्त रहकर परिणाम की परवाह किये बिना, फलासक्ति से रहित रहकर योगधर्म व राष्ट्रधर्म को निष्ठापूर्वक निभाना। ये हर नागरिक का पूर्ण कर्तब्य है तो मतलब  है की बिना धर्म के नीति और मार्ग के बिना राजनीती  राजनीती नहीं कूटनीति का रुप ले लेती है (धर्म  और राजनीती -ससक्त राष्ट्र )
लेकिन आज के इस पाखंड के बाजार में न कोई राष्ट्र धर्म का महत्त्व रहा गया न कोई विधि राजनीती की जिसे कोई भी   राष्ट्र का भला हो सके हमरे देश में ऋषि मुनियो का या   धर्मगुरु का सिर्फ    आशीर्वाद या मार्गदर्सन म ही रहा करता था चाहे हो गुरु वासिस्ष्ट ,या आचर्य चाणक्य या  देवराहबाबा  जी सभी ने केवल इक मार्गदर्सन दिया खुद राजा सासंद जैसे पदो के लालच में नहो पड़े लेकिन आज कुछ ताथाकथित कलयुगी संतो  लिबास पहन कर और खुद को भगवान का एजेंट बता कर राजनीती में अपना हाथ साफ करते है मतलब आस्था के साथ पूर्ण खिलवाड़ मै  मानता हु की एक  अच्छे राष्ट्र के लिए धर्म जरुरी है पर धार्मिक पखवाडा  उचित नहीं है ये देश राम का भी और रहीम का भी   है  तुलसीदास  का भी है तो कबीर दस का भी है धर्म जो भी हो वो राष्ट्र का विकाश  ही चाहता है लेकिन कुछ कलयुगी बाबा लोगो के आस्था के साथ खिलवाड़ कर धर्मं     का  मायने पर ही सवालिया निसान लगा दिया मेरा सिर्फ एक  ही तर्क है की लोगो को उपदेश जो देते है बाब लोग वो खुद पर लागु क्यों नहीं करते है ,अभी भी राष्ट्र को के लोग को सोचना चाहिए की लोभ मोह ये  गुण बड़े बड़े बाबा  को फास लिया है तो फिर राष्ट्र का विकास कैसे ,अपनी सोच को आप सब सकरतमक करे और इक अचे राजनीतीक नागरिक की तरह आज के युग में अचे लोग का चुनाव करे बाबा लोग या अन्य कोई धार्मिक गुरु का समर्थन बिलकुल मत करे क्यों की एक सच्चे देशभक्त के लिए सबसे बड़ा उसका राष्ट्र धर्म ही होता है   आज  के  समय में अकोई भी धर्म गुरु पहले अपना लाभ भी सोचत  है इसलिए  धर्म को आज नीति से दूर ही रखा जाये तो आज के लिए बेतहर कल  बनेगा 
                                                   राष्ट्र धर्म परमो उच्च  धर्म || इदं राष्ट्राय इदन्न मम ||
                                                 राजा पंडित (ये मेरे अपने विचार )
                                  
 
  






रविवार, 31 जनवरी 2016

 प्रेम में हम किसी को हृदय से लगा लेते हैं। दो देह पास आ जाती हैं, लेकिन दूरी बरकरार रहती है, दूरी मौजूद रह जाती है। इसलिए हृदय से लगाकर भी किसी को पता चलता है कि हम अलग-अलग हैं, पास नहीं हो पाये हैं, एक नहीं हो पाये हैं। शरीर को निकट लेने पर भी, वह जो एक होने की कामना थी, अतृप्त रह जाती है। इसलिए शरीर के तल पर किये गये सारे प्रेम असफल हो जाते हों, तो आश्चर्य नहीं। प्रेमी पाता है कि असफल हो गये। जिसके साथ एक होना चाहा था, वह पास तो आ गया; लेकिन एक नहीं हो पाये। लेकिन उसे यह नहीं दिखायी पड़ता कि यह शरीर की सीमा है कि शरीर के तल पर एक नहीं हुआ जा सकता, पदार्थ के तल पर एक नहीं हुआ जा सकता, मैटर के तल पर एक नहीं हुआ जा सकता। यह स्वभाव है पदार्थ का कि वहां पार्थक्य होगा, दूरी होगी, फासला होगा। 
आप सभी को ,मेरा  प्रणाम  मै  राजा पंडित लेकर  कुछ नया हाज़िर हु 
आज कुछ राजनीति बात आपसे शेयर कर रहा ह 
मोदी जी के कार्यकाल विकाश की दृस्टि से देखा जाये  बेहतर है ,राजनीती दृतिकोण से निर्णय उचित नहीं 
                                                                                       राजा पंडित 

रविवार, 18 अक्टूबर 2015

मोक्ष क्या है :
 मोक्ष एक ऐसी दशा है जिसे मनोदशा नहीं कह सकते। इस दशा में न मृत्यु का भय होता है न संसार की कोई चिंता। सिर्फ परम आनंद। परम होश। परम शक्तिशाली होने का अनुभव। मोक्ष समयातीत है जिसे समाधि कहा जाता है।मोक्ष या समाधि का अर्थ अणु-परमाणुओं से मुक्त साक्षीत्व पुरुष हो जाना। तटस्थ या स्थितप्रज्ञ अर्थात परम स्थिर, परम जाग्रत हो जाना। ज्ञाता, ज्ञान और ज्ञेय का भेद मिट जाना। इसी में परम शक्तिशाली होने का 'बोध' छुपा है, जहां न भूख है नप्यास, न सुख, न दुख, न अंधकार न प्रकाश, न जन्म है, न मरण और न किसी का प्रभाव।हर तरह के बंधन से मुक्ति। परम स्वतंत्रता अतिमानव या सुपरमैन।संपूर्ण समाधि का अर्थ है मोक्ष अर्थात प्राणी का जन्म और मरण के चक्र से छुटकरस्वयंभू और आत्मवान हो जाना है। समाधि चित्त की सूक्ष्म अवस्था है जिसमें चित्तध्येय वस्तु के चिंतन में पूरी तरह लीन हो जाता है। जो व्यक्ति समाधि को प्राप्त करता है उसे स्पर्श, रस, गंध, रूप एवं शब्द इन 5 विषयों की इच्छा नहीं रहती तथा उसे भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी, मान-अपमान तथा सुख-दु:ख आदि किसी की अनुभूति नहीं होती

बुधवार, 5 अगस्त 2015

"महाकुंभ"
आस्था का सिंगस्थ  महाकुम्भ
       नासिक
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
हमारे देश में आस्था का सब पर्व का  मूल है उसी आस्था की रूप लिए ये है महाकुम्भ का मेला जो भारत में ही नहीं पूर्ण विस्व में प्रसिद्ध माना जाता है ये महाकुम्भ का महापर्व  मुख्य रूप से भारत में प्रमुख इलाहाबाद(प्रयागराज)यूपी
हरिद्वार(उत्तरांचल)
उज्जैन(मध्य प्रदेश)
नासिक (महाराष्ट्र)
इस बार ये महाकुंभ
नासिक में लग रहा है
सिंगस्थ  महाकुम्भ( गुरु का सूर्य में प्रवेश) नासिक में गोदावरी और कपिला नादी का संगम है जहा पर भक्त गण इस् अमृत युत जल में स्नान कर अपने जन्म जन्म के पापो से मुक्त हो जाते है
3RD EYE ASTRO WORLD(REG)
राजा पण्डित
09236553033

मंगलवार, 21 जुलाई 2015

3RD EYE ASTRO WORLD(REG)
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BY राजा पंडित"आराध्य"
09236553033
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🚩🚩🚩🚩
मित्रो आज जो मै कांसेप्ट लिख लिख रहा हु व् बड़ा अटपटा है
हो सकता है आप को भी बुरा लगे 🚩
जब कुंडली में सूर्य+राहु की युति की युति होती है
या इन दोनो की दृस्टि नवम नवम भाव या तृतीय भाव पर पड़ती है तो लोग "पितृ दोष "में आ जाते है
🚩मित्रो आपको ज्ञात है की
सूर्य-पिता का कारक
राहु -दादा (पितामह) का कारक
चुकी राहु इक छाया ग्रह है
मतलब पित्र भी छाया के ही जैसे होते है उनका सरीर नहीं होता है
इस कारण से जब राहु की युति सूर्य से होती है तो पित्र दोष का योग बनता है🌿🌿🌿
मित्रो सोचिये की पिता व् दादा का संयोग को लोग पित्र दोष की श्रेणी में ला देते है
लोग इस युति पर नेगेटिव ही बोलते है🚩🚩पर मित्रो आपको ये मालूम होना चाहिए की ये योग ये आपको सूचित करता है की आपके पित्र आपसे कितना प्यार करते है की आपके साथ हमेसा रहते है मित्रो ये योग मेरे हिसाब से बहुत अछा है
क्योंकि आपको "पिता के साथ पित्र का भी"असिरवाद मिल रहा है
मेरे तर्क है की मै दुनिया में अगर आया हु तो इसमें पित्र का बहुत असिरवाद होता है इस्वर भी पित्र में वास् करता है
🚩
पित्र हमें जीवन में बहुत कुछ देकर जाते है लोग बोलते है की
ये सम्पति मेरे पूर्वज ने हमें प्रदान किया है या उनकी है
मतलब उनकी सम्पति यूज़ करने का हमें हक़ है तो उनकी सेवा भी करना हमरा हक़ बनता है
🌿🌿🚩🙏🚩
मित्रो मतलब साफ़ की पित्र दोष वास्तव में होता ही नहीं पित्र कभी भी अपने वंसज का विनास नहीं करते लेकिन अगर उनकी नियमित पूजा व् उनके नाम का दान न किया जाये तो वो जातक की "मिरतु तुल्य "
कास्ट प्रदान करते है
🙏👉मित्रो जाहिर सी बात है की ये योग ये आपको दर्षाता है की आपका पितृ के प्रति जो ऋन है उसकी अछे से चूक दीजिये
🚩🌿🌿🌿🌷
मतलब साफ़ अगर मेरे पित्र हमसे खुश नहीं है तो हमें इस्वर व् गुरु की कृपा नहीं मिलती है ।मतलब 9 भाव का स्वामी गुरु
होता है 🙏👉मतलब मित्रो आपकी कुण्डली में जब 9 भाव में पित्र योग बनता है तो आगर आप पित्र को खुस नहीं करते है तो आपका'"गुरु"कभी भी मतलब आपका धर्म व् गुरु व् देव
🌿🌿🙏 कभी भी आपका साथ नहीं देंगे
👉मित्रो मैं जो लिखा हु अगर आपको बुरा लगे तो मैं आपसे दोनों हाथ🙏🙏🙏❤🙏 जोड़कर छःमाँ
मागता हु
🙏🙏🌿👉👉❤❤
🙏➡राजा पंडित
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सोमवार, 20 जुलाई 2015

शनिवार, 18 जुलाई 2015

आज का सुविचार
एस्ट्रोलोजर आपका भाग्य नहीं बदल सकता है
वो इस्वर नहीं है लेकिन उसके मार्गदरसान पर आप अपने को बदल सकते है
भरोसा खुद पर रखे
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आज रविवार
जिनका सूर्य ठीक न हो  वो ये
उपाय करे
🙏➡ भगवान राम की आराधना करे |
🙏➡ आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करे,
🙏➡ सूर्य को आर्घ्य दे, गायत्री मंत्र का जाप करे |
🙏➡ ताँबा, गेहूँ एवं गुड का दान करें।
🙏➡ प्रत्येक कार्य का प्रारंभ मीठा खाकर करें।
🙏➡ताबें के एक टुकड़े को काटकर उसके दो भाग करें। 🙏➡एक को पानी में बहा दें तथा दूसरे को जीवन भर साथ रखें।
🙏➡ ॐ रं रवये नमः या ॐ घृणी सूर्याय नमः 108 बार 1 माला जाप करे|
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➡ मंगल दाेष की भूमिका में
मंगल, मंगल भी व मंगल अमंगल भी  -शाेध राजा पंडित इलाहाबाद

मित्रों आज बात कर रहा हूं मांगलिक दाेष पर वास्तव में मंगल काे विवाह के लिए अशुभ क्याे माना जाता है जबकि विवाह में मांगलिक कार्यों में मंगल के रंग (लाल 🎨) का प्रयोग का प्रयोग हम बेहिचक करते हैं मंगल का महत्व विवाह में काफी ज्यादा है मेरा मानना है की सर्वप्रथम की मंगल के बारे में आप सभी नकारात्मक विचार धारा त्याग दें जन्म कुंडली में  स्वस्थ मंगल ही हमें भूमि, वाहन व सहोदर, नेता, साहस ये सब मंगल से ही हाेता है
लाख हम मजबूत हाे लेकिन हमारा साहस हमारे साथ नहीं है ताे हम कभी भी विपरीत परिस्थिति का सामना नहीं कर सकते मतलब साफ है मगंल का मजबूतपन हमारे कुंडली में हाेने चाहिए
आप सब जानते हैं कि हर व्यक्ति में गुण दाेष पाये जाते हैं ठीक उसी प्रकार से ग्रह 🌍 में भी गुण दाेष पाये जाते हैं
मंगल दछिण दिशा का स्वामी हाेता है व जाति का  छात्रिय हाेता मगंल कभी भी परास्त नहीं हाेता अंतिम छण तक हिम्मत 💪 प्रदान करता है मगंल मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा  का स्वामी है और मंगल के नायक देवता हमारे पूर्ण ब्रह्मचारी हनुमान जी है इसलिए दछिण मुखी हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए
विवाह में यह करन है की विलंब हाेता है क्योंकि हनुमानजी जी अविवाहित है
आप जानते हैं की लाेहा लाेहे काे कटता है यही करण है की मगंलिक का विवाह, मांगलिक से ही हाेता है ताकि काेइ समस्या न हो पर मेरा मानना है कि अगर मंगल की विधिवत शांति करवाने से भी मंगल शात हाेगा
क्यों कि हनुमानजी जी बहुत दयालु है
जन्म कुंडली में जब मगंल 1,4,7,8,12, हाे तो मंगल दाेष लगता है
मित्रों ये बात आप जान ले की विवाह में शानि +मंगल की भूमिका महत्वपूर्ण है अकेला मंगल विवाह के लिए दाेषी नहीं माना जा सकता है
मंगल के उच्च, स्वगृही, हाेकर मगंल दाेष बनने पर मंगल का सूर्य, राहु या शानि के साथ हाेने पर, चंद्र मंगल या गुरु मंगल याेग बनने पर मंगल दाेष में कमी हाेती है,
गुरु के साथ लग्न या केन्द्र में हाेने से मगंल दाेष नगण्य माना जाता है
मंगल पर शुभ ग्रह का प्रबल प्रभाव या दृष्टि या मगंल का अति निर्बल व अस्त हाेने पर मंगल का दाेष खत्म हो सकता है मेरा मानना है की मगंलिक की व्यवस्था विधिवत शांति से गैर मांगलिक से विवाह संभव है
मंगल शांति के अचूक उपाय
1-मंगलिक हाेने पर जातक कुल गुरु से हमेशा असिरवाद ले गुरु का चरणामृत नित्य सेवन करें मेरा तर्क है कि मंगल छत्रिय है और ब्रह्माण उसका गुरु है मतलब साफ है मंगल सबसे ज्यादा सम्मान गुरु काे देता है
2- नित्य 21मंगलवार बहते हुए पानी 💦 में रेवड़ी फेंके, खासकर जब चंद्रमा धनिष्ठा नछत्र का हाे और जब मंगलधनिष्ठा नछत्र का हाे ताे लगातार यह उपाय करें मेरा तर्क है की धनिष्ठा का देवता वरुण है अतः यह उपाय करगर है
3-  प्रत्येक माह के मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा नछत्र में मगंल का दान अवश्य करें दान में चावल, शास्त्र, गुड, मसूर लाल वस्त्र, केसर,108 लाल फूल की बनी माला हनुमान जी काे अर्पित करें
4-मंगल संक्राति काे शुभ कार्य  करे
5- उत्तम प्रकार का मुंगा धारण करें
6- मुगें की  सामग्री हनुमान जी काे, अर्पित करें 7 मंगल वार
6-जातक के जन्म कुंडली में मगंल जहां भी स्थित हाे वहा के नछत्र स्वामी व देवता का उपाय जरूर करें
7- मंगल चंडिका मंत्र का विधिवत अनुष्ठान करवे किसी देवी मंदिर में मंगल के नछत्र में
नाेट -मित्रों मैं इश्वर की कृपा से यह शाेध किया है परन्तु मैं संपूर्ण नहीं हूं अत आप आपना आलोचनात्मक कंमेट जरूर दे
में सुधारने का प्रयास करूंगा
आपका कृपा पात्र
राजा पंडित
इलाहाबाद 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏👏👏👏👏👏❤❤👏👏
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आज का सुविचार
18/7/2015
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अनाज का कच्चा दाना ज़मीन में डालने से उग जाता है और अगर वही दाना पक गया हो तो उगता नहीं, बल्कि उस ज़मीन में विलीन हो जाता है | इसी तरह अगर आत्मा का प्रेम कच्चा है तो वह बार-बार जन्म लेती है और यदि वह प्रेम पक्का है तो परमात्मा उसे अपने में विलीन कर लेता है....
TODAY TIPS OF DAY
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आज शनिवार हे और आज के दिन अगर पीपल को पानी में तिल डाल कर जल अर्पण करे तो निश्चित रूप से बरकत वाला पैसा आता हे।क्योकि हर शनिवार को पीपल के वर्क्ष में भगवान विष्णु और लक्ष्मी का वास होता हे और रविवार के दिन विष्णु और दरिद्रता का वास होता हे। इसलिए हर शनिवार को जल अर्पण करके जड़ को हाथ लगाकर मनोकामना मांग सकते हे।शनिवार को पीपल के पेड़ के निचे सरसों के तेल का दीपक जलावे चार बत्ती वाला तो शत्रु बाधा दूर होती हे।सोमवार से शनिवार के दिन रोज परिक्रमा करने से भाग्यशाली बनते हे।अगर कोई ज्यादा बीमार हे और दवाई असर नही कर रही हे तो पीपल के पेड़ की जड़ को मरीज के पास रखकर प्राथना करे तो आशातीत परिणाम निकल सकता हे।DIVINE SOUAL RAJA PANDIT
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